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Solar Eclipse 2026
Solar Eclipse 2026 के बारे में सब कुछ जानें। 17 फरवरी का 'रिंग ऑफ फायर' और 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण कहाँ और कब दिखाई देगा? क्या भारत में सूतक लगेगा? पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
Poonam Pande
2/16/20261 min read


साल 2026 खगोलीय घटनाओं के शौकीनों के लिए बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इस साल दो महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहे हैं। यदि आप भी solar eclipse 2026 के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।
खगोल विज्ञान में सूर्य ग्रहण एक ऐसी घटना है जो तब घटती है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इससे सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाती और कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाता है। solar eclipse 2026 की खास बात यह है कि इस साल हमें 'रिंग ऑफ फायर' और 'पूर्ण सूर्य ग्रहण' दोनों का अनुभव होगा।
1. साल का पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी 2026
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा। इसे "रिंग ऑफ फायर" भी कहा जाता है क्योंकि इसमें चंद्रमा सूर्य के बीच के हिस्से को ढक लेता है, लेकिन किनारों से रोशनी एक चमकदार छल्ले की तरह दिखाई देती है।
समय और अवधि (भारतीय समयानुसार):
शुरुआत: दोपहर 03:26 बजे
मध्य (पीक): शाम 05:42 बजे
समाप्ति: रात 07:57 बजे
कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 30 मिनट
कहां-कहां दिखाई देगा?
यह solar eclipse 2026 मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों और दक्षिण अमेरिका (जैसे अर्जेंटीना और चिली) में देखा जा सकेगा।
महत्वपूर्ण जानकारी: यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका धार्मिक सूतक काल मान्य नहीं होगा।
2. साल का दूसरा सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त 2026
अगस्त के महीने में होने वाला solar eclipse 2026 दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा। 1999 के बाद यह पहली बार होगा जब यूरोप के मुख्य हिस्से में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जाएगा।
ग्रहण का पथ (Path of Totality):
यह ग्रहण रूस के उत्तरी हिस्से से शुरू होकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन तक जाएगा। स्पेन में यह नजारा सूर्यास्त से ठीक पहले दिखाई देगा, जो बेहद खूबसूरत होगा।
[Image showing the path of totality for the August 12 2026 solar eclipse]
3. Solar Eclipse 2026 और ज्योतिषीय महत्व
भारत में सूर्य को देवता माना जाता है, इसलिए solar eclipse 2026 का ज्योतिषीय प्रभाव भी काफी चर्चा में है। 17 फरवरी का ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा।
सूतक काल: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। हालांकि, चूंकि solar eclipse 2026 भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए यहां मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और सामान्य दिनचर्या जारी रहेगी।
सावधानियां: भले ही ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गर्भवती महिलाओं को इस समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जैसे नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करना।
4. वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह साल?
वैज्ञानिकों के लिए solar eclipse 2026 सूर्य के कोरोना (बाहरी वायुमंडल) का अध्ययन करने का एक सुनहरा अवसर है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, तब सूर्य का चमकदार बाहरी हिस्सा 'कोरोना' साफ दिखाई देता है।
5. ग्रहण देखने के लिए सुरक्षा टिप्स
अगर आप उन देशों में हैं जहाँ solar eclipse 2026 दिखाई देगा, तो इन बातों का ध्यान रखें:
कभी भी नग्न आंखों (Naked Eyes) से सूर्य की ओर न देखें।
हमेशा ISO प्रमाणित सोलर फिल्टर चश्मों का ही उपयोग करें।
साधारण धूप के चश्मे (Sunglasses) आपकी आंखों को नहीं बचा सकते।
टेलिस्कोप या कैमरे का उपयोग करते समय उन पर भी सोलर फिल्टर जरूर लगाएं।
6. जानवरों पर प्रभाव
क्या आप जानते हैं कि solar eclipse 2026 जैसे बड़े ग्रहणों के दौरान जानवर भ्रमित हो जाते हैं? अचानक अंधेरा छाने से पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं और पालतू जानवर भी बेचैन महसूस कर सकते हैं। यह प्रकृति का अपना तरीका है खगोलीय बदलावों पर प्रतिक्रिया देने का।
निष्कर्ष
solar eclipse 2026 साल की सबसे बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक है। चाहे आप इसे विज्ञान की दृष्टि से देखें या ज्योतिष की, यह हम सभी को ब्रह्मांड की विशालता का अहसास कराता है। हालांकि भारत के लोग इसे सीधे नहीं देख पाएंगे, लेकिन ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए इस 'रिंग ऑफ फायर' और पूर्ण ग्रहण का आनंद लिया जा सकता है।